Middle Class ख़यालों की जोरी

आसमान से
तोड़ लाऊँ
चाँद-तारे
सजा दूँ इन गहमा-गहमी वाले रास्तों पर
रोक दूँ ये traffic
रोक दूँ ये चहल-पहल
कि बस हो गई ये भागा-दौड़ी


जादू ना आए तो
जादूगर ही सही
सीख लूँ छड़ी के मंत्र,
आम के मौसम में
पेड़ों पर आम की जगह खट्टे-मीठे lollipop उगाऊँ


खेल कई
खिलाड़ी कई
और ख़त्म ना होने वाली पढ़ाई
ना ख़त्म हुए exams में आने वाले सवाल,
बोहोत हुई अब घिसाई
इन students को आतंकवादी घोषित कर
School–Colleges बंद करवाऊँ


कई हो गए गड्ढे और छलनी-छलनी हुए रास्ते
हर रोज़ ठोकरें खा-खा कर…
अब मेरी गाड़ी के suspension भी कह दिए—
“माफ़ी करो मालिक, अब हमसे ये बर्दाश्त ना हो पाए”
(और चल दिए अपने मायके)


गिरफ़्तार करूँ इन BMC और PMC के contractors और clerks को
ले चलो इन्हें “आमरण उपोषण” पर इन गड्ढों की बस्तियों में
वहाँ बसने वाले कुपोषित बच्चे भी केह दें इन्हें—
“एक-दो दाँव Dangal के हमारे साथ भी लगाएँ!”
(जो जीता वही Corporator!)


इन चोर बाज़ारों में ले चल पड़ता हूँ हर इतवार
लेकर अपने ख़यालों की बोरी
काश हो जाए घर आने से पहले इनकी चोरी


फिर कोई और बने…
जादूगर या शायर
या बने आतंकवादी या School का master
हम अब ना सह पाए इन middle class ख़यालों की जोरी!


— नि. भो.


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